
शिमला। कौशल विकास भत्ते पर सरकार ने फिर नया पेंच फंसा दिया है। अब यह भत्ता केवल सूचीबद्ध केंद्रों मेें प्रशिक्षण लेने पर ही मिलेगा। उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली जिला कमेटियां ही ऐसे केंद्रों को निरीक्षण के बाद एंपैनल करेंगी। सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। उप सचिव श्रम एवं रोजगार पदम चौहान ने इसकी पुष्टि की है। अधिसूचना (संख्या श्रम(एफ)1-2/ 2013) के अनुसार इन कमेटियों के अध्यक्ष उपायुक्त, उपाध्यक्ष एडीसी या एडीएम, सचिव जिला रोजगार अधिकारी, तीन सदस्य जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के महाप्रबंधक, जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) के परियोजना निदेशक और पालीटेक्निक कॉलेज या आईटीआई के प्रधानाचार्य हाेंगे। कौशल विकास भत्ता योजना 2013 का लाभ वही प्रशिक्षु ले सकेंगे, जिनका संस्थान कमेटी से एंपैनल हो चुका है।
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इन पैरामीटरों पर एंपैनल होंगे संस्थान
आधारभूत ढांचे में भवन की उपलब्धता, कमरों की संख्या, प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण उपकरणों को देखा जाएगा। प्रशिक्षण कुशलता जैसे फै कल्टी की योग्यता, अनुभव, फैकल्टी सदस्यों की संख्या। प्रशिक्षण की गुुणवत्ता जैसे विषयवस्तु, प्रशिक्षण की अवधि, प्रमाणपत्र का प्रकार। ट्रेनिंग सामग्री और स्किल की एससीवीटी, एनसीटीवी, एआईसीटीई, एनवीईक्यूएफ, एमईएस जैसे प्रतिष्ठित सरकारी एजेंसियों से मान्यता जरूरी होगी। ट्रेनिंग देने वाले संस्थान राज्य और केंद्र सरकार के कोर्स ऑफर करने वाले संगठनों से मान्यता प्राप्त होने चाहिए। एनजीओ हों तो वे भी सोसाइटी पंजीकरण एक्ट या कंपनी एक्ट के तहत पंजीकृत होने चाहिए।
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जिला कमेटियों को विशेषाधिकार भी
अधिसूचना के अनुसार निर्दिष्ट पैरामीटर सांकेतिक होंगे, ये संपूर्ण नहीं होंगे। जिला कमेटियां अगर प्रशिक्षण देने वाले संस्थान के बारे में अपने स्तर पर आश्वस्त होती हैं, तो वे खुद भी एंपैलनमेंट का निर्णय ले सकती हैं।
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इस साल खर्च नहीं हो पाएंगे 100 करोड़
योजना पर मौजूदा वित्त वर्ष में 100 करोड़ के बजट की व्यवस्था है। पूरी रकम खर्च नहीं हो पाएगी। सरकारी स्तर पर भी यह माना जा चुका है। शुरू से ही यह योजना एक के बाद एक पेंच की वजह से लचर तरीके से चल रही है।
